दुर्गा पूजा पर निबंध | Essay on Durga Puja in Hindi

भारत एक विविधताओं का देश है यहाँ पर सभी समुदाय के लोग निवास करते है। दुर्गा पूजा हिन्दुओ का बहुत ही पवित्र पर्व है। इसे बुराई पर अच्छाई के जित के प्रतिक के रूप में मनाया जाता है। ऐसे तो दुर्गा पूजा पुरे भारत में हर्ष उल्लास के साथ मनाया जाता है पर मुख्य रूप से इसे भारत के पूर्वी राज्य जैसे की पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखण्ड, और बिहार इत्यादि राज्यों में ये बहुत ही धूम धाम से मनाया जाता है।

खासकर ये भारत के पूर्वी राज्य पश्चिम बंगाल का मुख्य त्यौहार है और बहुत ही धूम धाम से मनाया जाता है। लोग इस दिन का काफी बेसब्री से इंतजार करते है। लोग इस अवसर पर बड़े बड़े पूजा पंडाल बनाते है और माता दुर्गा को स्थापित कर 9 दिनों तक पूजा करते है, कई लोग तो 9 दिन उपवास रख माता दुर्गा से आशीर्वाद, सुख समृद्धि प्राप्त करते है।

और फिर नवरात्री ख़त्म होने पर दशवें दिन रावण का पुतला दहन किया जाता है, इस अवसर पर मेले, और गीत संगीत, सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन होता है।  तो चलिए आज इस Essay on Durga Puja in Hindi लेख के माध्यम से हम आपको दुर्गा पूजा पर निबंध 200 शब्दों में, दुर्गा पूजा 2021 और दुर्गा पूजा के बारे में जानेंगे। 

दुर्गा पूजा क्यों मनाया जाता है?

देवी दुर्गा का वर्णन कई प्रकार के प्राचीन धर्म ग्रंथो में किया गया है। खासकर ऋग्वेद में देवी दुर्गा का वर्णन किया गया। मान्यता ये है की महिषासुर नामक असुर राजा ने तीन लोक के देवताओं पर आक्रमण कर दिया और और ये बहुत ही बलशाली, शक्तिशाली राजा था, इसे कोई हरा नहीं पा रहा था। जब जाकर सी धरती को महिषासुर से मुक्ति दिलाने के लिए स्वर्ग के देवता ब्रह्मः, विष्णु, और महेश ने अपने शक्ति से दुर्गा नामक देवी का सृजन किया।

essay on durga puja in hindi
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और देवी दुर्गा को दस हाथों में दस तरह के विशेष हथियार लिए एक नारी शक्ति का रूप थी। इस देवी को इतना शक्ति दी गयी ताकि ये महिषासुर का वध कर सके ,फिर देवी दुर्गा और महिषासुर के बिच 9 दिन और रात चले युद्ध के बाद अंततः दसवें दिन महिषासुर का वध कर दिया। और तब से लेकर आज भी इस दिन को विजय दशमी के रूप में मनाते है। 

रामायण के अनुसार जब पुरुषोत्तम राम रावण का वध करने जा रहे थे तब इन्होने माँ दुर्गा से शक्ति प्राप्त के लिए चंडी पूजा  अर्चना की थी और आशीर्वाद ग्रहण किये थे और तब जाकर दसवे दिन रावण का वध किया। तब से लेकर अब तक इस दिन को विजय दशमी के रूप में बहुत ही धूम धाम से मनाते है। 

दुर्गा पूजा कब मनाया जाता है?

दुर्गा पूजा हिन्दू धर्म का एक बहुत ही पवित्र त्यौहार है इसे बुराई पर अच्छाई के प्रतिक के रूप में मनाया जाता है। ये त्यौहार हर साल अश्विन माह के शुक्ल पक्ष के दिन शुरू होती है और अश्विन शुक्ल माह पक्ष की दशमी तिथि को इसका समापन हो जाता है। साल 2021 में दुर्गा पूजा की शुरुआत 7 अक्टूबर को हो रही है और इसका समापन विजयदशमी मनाने के साथ 15 अक्टूबर 2021 को हो जाएगी।

दुर्गा पूजा कैसे मनाया जाता है?

ऐसे तो दुर्गा पूजा पुरे भारत में बहुत ही धूम धाम से मनाई जाती है पर विशेष रूप से इसे भारत के पूर्वी राज्य पश्चिम बंगाल में तो इसे काफी धूम धाम से मनाया जाता ही है साथ में और भी राज्य जैसे की बिहार, झारखण्ड, ओडिशा, त्रिपुरा इत्यादि राज्यों में भी नवरात्री बहुत ही हर्ष उल्लास के साथ मनाया जाता है। 

जैसे ही नवरात्री की शुरुआत होती है कई लोग 9 दिन तक उपवास रखते है और इस 9 दिनों में देवी शक्ति के 9 अलग अलग रूप की पूजा आराधना वैदिक मंत्रोच्चार के साथ की जाती है और भक्तगण इन सभी 9 दिनों में माता दुर्गा की पूजा अर्चना कर आशीर्वाद लेकर अपने जीवन में खुशहाली प्राप्त करते है।

ऐसे तो नवरात्री के सभी दिन अपने आप में खाश होते है। खासकर सप्तमी, अष्टमी, नवमी और दशमी के दिन बहुत से गीत संगीत, सांस्कृतिक कार्यक्रमो का आयोजन होता है। माँ दुर्गा का पट सप्तमी के दिन श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोलने का विधान है। इस अवसर पर बड़े बड़े शहरो में पंडाल बनाने की शुरुआत एक-दो महीने पहले से हो जाती है। बड़े और भव्य पंडाल बनने के बाद इसकी खूबसूरती देखती ही बनती है।

आम लोग सांस्कृतिक कार्यक्रम का आनंद लेते है। इस अवसर पर मेले, मीणा बाजार इत्यादि लगते है। बच्चे से लेकर बूढ़े लोग भी मेले घूम कर खुशियों में खो जाते है। और विजयदशमी या रावण वध के साथ ही इस महापर्व का समापन हो जाता है। और फिर अगले दिन श्रद्धालुओं माता दुर्गा को नम आँखों से विदाई देकर पानी में विसर्जित कर देते है। 

दुर्गा पूजा का महत्व

दुर्गा पूजा हिंदुओ का एक महत्वपूर्ण और पवित्र नाँव दिनों तक चलने वाला त्योहार है। माँ दुर्गा को पूजा कर करने से सुख, समृद्धि आती है और अंधकार का नाश और बुरी शक्तियों का अंत होता है। इस अवसर पर 10 दिनों की सरकारी छुट्टी होती है। घर से दूर रहकर जीवन यापन करने वाले लोग अपने घर आते और सपरिवार इस पर्व को खुशियों के साथ मनाते है। 

इस अवसर पर भव्य पंडाल बनाये जाते है। भारत के कई स्थानों पर खासकर पश्चिम बंगाल में महिलायें के द्वारा सिंदूर खेला करने की प्रथा प्रचलित है। नवरात्री के अंतिम चार दिन सप्तमी, अष्टमी, नवमी और दशमी को लोग विशेष तौर पर मनाते है और दशमी के दिन रावण वध के साथ दुर्गापूजा का समापन हो जाता है।

दुर्गा पूजा पर निबंध 200 शब्दों में

दुर्गा पूजा हिन्दू धर्म का एक बहुत ही पवित्र त्यौहार  है। इसे बुराई पर अच्छाई की जित के प्रतिक के रूप में मनाया जाता है। ऐसे तो इसे भारत के हर एक कोने में इसे मनाया जाता है पर खासकर इसे भारत के पूर्वी राज्य जैसे की पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखण्ड, ओडिसा , त्रिपुरा में बहुत ही धूम धाम से मनाया जाता है। नवरात्री की शुरुआत अश्विन शुक्ल पक्ष में के दिन कलश स्थापना के साथ होती है। 

दुर्गापूजा के अंतिम चार दिन सप्तमी, अष्टमी, नवमी और दशमी बहुत ही खास होता है। सप्तमी के दिन वैदिक मंत्रोच्चार के साथ माता दुर्गा का पट आम श्रद्धालुओं के लिए खोलने का विधान है। कई भक्तगण नवरात्री के नावों दिन उपवास रखते है और माँ दुर्गा को पूजा अर्चना कर आशीर्वाद ग्रहण करते है और अपने जीवन में सुख शांति की कामना करते है। 

इस अवसर पर बड़े-बड़े पंडाल बनाये जाते है और गीत, संगीत, सांस्कृतिक कार्यक्रम और मेले इत्यादि का आयोजन होता है और फिर दशमी के दिन रावण का वध और पुतला दहन किया जाता है। इसी के साथ इस पवित्र पर्व का समापन हो जाता है और फिर अगले दिन माँ दुर्गा को नाम आंखों से विदाई दे कर पानी में विसर्जित कर दिया जाता है। 

दुर्गा पूजा पर निबंध 10 लाइन (Durga puja essay in hindi 10 lines)

  • दुर्गा पूजा की शुरुआत अश्विन माह के शुक्ल पक्ष के दिन होती है और समापन अश्विन शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को हो जाती है 
  • यह हिन्दू धर्म का एक प्रमुख्य पर्व है। 
  • इसे बुराई पर अच्छाई की जित के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। 
  • माँ दुर्गा ने महिषासुर नामक असुर का वध नाँव दिन और रात युद्ध का किया था 
  • रावण का वध करने से पहले भगवान राम ने माँ दुर्गा का की पूजा अर्चना कर आर्शीवाद लिए थे। 
  • सप्तमी के दिन माँ दुर्गा का पट आम श्रद्धालुओं के लिए खोलने का विधान है। 
  • इस अवसर पर गीत, संगीत, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, मेले इत्यादि का आयोजन किया जाता है। 
  • दशमी के दिन रावण का वध होता है इसे विजयदशमी के रूप में भी जाना जाता है। 
  •  माँ दुर्गा को नाँव दिन तक पूजा की जाती है और फिर विजयदशमी के बाद पानी में विसर्जित कर दिया जाता है। 
  • पश्चिम बंगाल का यह मुख्य त्यौहार है इस अवसर पर वहां पर सिंदूर का खेल आयोजन किया जाता है और माँ दुर्गा से फिर आने की आग्रह की जाती है। 

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