इसरो (ISRO) क्या है? ISRO Full Form in Hindi

आज के इस आर्टिकल में हम बात करेंगे भारत की आन बान शान, भारत की राष्ट्रीय स्पेस एजेंसी ISRO (Indian Space Research Organisation) की। इसरो ने खुद दे द्वारा विकसित किये गए तकनीत एवं अपने मिशन के जरिये भारत का नाम पूरी दुनिया में रौशन किया है। अब इसरो दूसरे देशों के उपग्रहों को भी अपने शक्तिशाली लॉच व्हीकल के जरिये अंतरिक्ष में भेज रहा है।

इसरो ने भारत का खुद का नेविगेशन सॅटॅलाइट सिस्टम विकसित किया है, जिसका नाम है NAVIC (Navigation with Indian Constellation) दुनिया में बहुत कम ही देश है जिनके पास खुद का नेविगेशन सिस्टम है।

इसरो ने अपने कई सफल मिशनों के जरिये भारत को विश्व के चुनिंदा देशो अमेरिका, चीन, रूस जैसों देशों के लिस्ट में शामिल कर दिया है। तो चलिए आज के इस आर्टिकल में हम विस्तार से जानेंगे इसरो (ISRO) क्या है ISRO का फुल फॉर्म क्या है और इसके संस्थापक कौन है।

isro full form in hindi
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इसरो एक नजर में –

संस्थान  ISRO (Indian Space Research Organisation)
स्थापना वर्ष  15 अगस्त 1969
प्रकार स्पेस एजेंसी
मुख्यालय बंगलौर, भारत
वर्त्तमान अध्यक्ष  S Somanath
आदर्श वाक्य मानव जाति की सेवा में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी
मुख्य लॉन्चिंग स्टेशन सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्री हरिकोटा, आँध्रप्रदेश
वार्षिक बजट  13949 करोड़ (2021-22)
आधिकारिक वेबसाइट www.isro.gov.in

इसरो (ISRO) क्या है?

इसरो (ISRO) भारत की राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी है। इसकी स्थापना 15 अगस्त 1969 ईस्वी को की गयी थी। इसका मुख्यालय भारत की सिलिकॉन वैली कहे जाने वाले शहर बंगलौर में स्थित है। इसरो भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग के अंतर्गत आता है। जो की सीधा भारत के प्रधानमंत्री के अंतर्गत आता है। इंडियन स्पेस प्रोग्राम का पिता विक्रम साराभाई को कहा जाता है।

आजादी के बाद जब भारत अपनी जड़ें मजबूत कर रहा था, उस समय भारत के महान वैज्ञानिक विक्रम साराभाई ने भारत के लिए एक स्पेस एजेंसी की जरुरत को महसूस किया, ताकि भारत सुरक्षा, तकनीक में दुनिया के विकसित देशों से मुकाबला कर सके सके। और इस तरह इसरो की नीवं पड़ी।

इसरो अपने तकनीक के जरिये विभिन्न क्षेत्रों जैसे की टेलेकम्युनिकशन्स, मिलिटरी, शिक्षा इत्यादि क्षेत्रों में तकनीक विकसित कर भारत को बाहरी, और आतंरिक रूप से सुरक्षा प्रदान करता है। और अब इसरो दुनिया का छठवां देश बन गया है जो पुरे तरीके से खुद का इंजन बना कर उपग्रहों को लॉच कर सकता है।

इसरो ने भारत का पहला उपग्रह, भारत के महान गणितज्ञ “आर्यभट्ट” के नाम पर रखा था जिसे 19 अप्रैल 1975 ईस्वी को रूस के द्वारा लांच किया गया था। चन्द्रमा पर पानी खोजने वाला इसरो दुनिया का पहला स्पेस एजेंसी बनी थी।

फरवरी 2017 में इसरो ने अपने प्रक्षेपण यान PSLV-C37 के जरिये कुल सिंगल मिशन में 104 उपग्रहों को सफलतापूर्वक प्रक्षेपित कर इतिहास रच दिया था। हालाकिं जनवरी 2021 में में एलन मस्क की कंपनी स्पेस एक्स ने सिंगल मिशन में 143 उपग्रह लांच कर रिकॉर्ड तोड़ दिया था।

इसरो के कितने केंद्र हैं?

ऐसे तो इसरो के देश भर में कई प्रयोगशालाएं, एजेंसी स्थापित है। पर मुख्य तौर पे कुल छह केंद्र है जो इस प्रकार है।

  1. विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) तिरुवनंतपुरम
  2. सतीशधवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC-SHAR) श्रीहरिकोटा
  3. इसरो उपग्रह केंद्र (ISAC) बंगलुरु 
  4. द्रव नोदन प्रणाली केंद्र (LPSC) तिरुवनंतपुरम, बंगलुरु, महेन्द्रगिरि
  5. राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (एनआरएससी), हैदराबाद
  6. अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (SAC), अहमदाबाद

इसरो की प्रमुख उपलब्धियां (isro main achievements)

19 अप्रैल 1975 ईस्वी को भारत ने अपना पहला उपग्रह “आर्यभट्ट” लांच किया गया, जिसे रूस के द्वारा लांच किया गया था।

साल 1983 ईस्वी में इसरो ने भारत का पहला कम्युनिकेशन सॅटॅलाइट INSAT-1B (Indian National Satellite System) लांच किया जो की उस समय का पहला सबसे बड़ा डोमेस्टिक सॅटॅलाइट सिस्टम था एशिया के क्षेत्र में , जो की भारत को टेलीकम्यूनिकेशन, मौसम पूर्वानुमान, और सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन इत्यादि में प्रयोग में आया।

जनवरी 2007 में इसरो ने सतीश धवन स्पेस सेंटर हरिकोटा, आँध्रप्रदेश से SRE-1 (Space Capsule Recovery Experiment) नामक मिशन PSLV C7 से लांच किया। इस पुरे मिशन का उद्देश्य  orbiting space capsule’s का रिकवरी करना था। एवं साथ में नेविगेशन, बढ़िया कम्युनिकेशन मैनेजमेंट स्थापित करना इत्यादि था।

इसरो ने चंद्रयान-1 को साल 2008 में लांच करके स्पेस की दुनिया में कीर्तिमान स्थापित कर दिया, चंद्रयान लांच करने के बाद इसरो का नाम भी दुनिया के बेहतरीन स्पेस एजेंसी के रूप में होने लगी थी। ये भारत का पहला चंद्रयान मिशन था। इसे लांच किया गया था ताकि, चन्द्रमा के सतह में मौजूद पहाड़, स्थलाकृति, और मून के सतह को अध्यन करना एवं चन्द्रमा में स्थित मिनरल्स का अध्यन करना।

साल 2014 में इसरो ने भारत का सबसे पॉवरफुल राकेट GSLV (Geosynchronous Satellite Launch Vehicle) MK3 विकसित किया। जो की 4000 KGS तक का लोड ऑर्बिट में ले जाने में सक्षम था। यह एक 3-stage medium lift launch व्हीकल है। इसमें तीन अंतरिक्ष यात्री भी जा सकते है। जो की भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि थी, क्यूंकि बहुत से देशों के पास ये टेक्नोलॉजी नहीं है।

साल 2014 में इसरो में मंगल ग्रह के लिए मंगलयान मिशन लांच किया जिसे आम तौर पर मार्श ऑर्बिटर मिशन (MOM) कहा जाता है। अब तक किसी भी देश ने पहले प्रयास में मंगल पर नहीं पहुंच सका था। पर भारत ने ये करके दिखाया, यह भारत के लिए एक बहुत ही बड़ी कामयाबी थी।

भारत मंगल ग्रह पर पहुंचाने वाला दुनिया का चौथे देश बन गया है अमेरिका, रूस, एंड यूरोप के बाद, और इसरो ने इस मिशन को बहुत की कम खर्चे, (450 करोड़) में ये कर के दिखता था। 

साल 2016 में  इसरो ने भारत का खुद का नेविगेशन सॅटॅलाइट सिस्टम विकसित किया है, जिसका नाम है NAVIC (Navigation with Indian Constellation) दुनिया में बहुत कम ही देश है जिनके पास खुद का नेविगेशन सिस्टम है। 

साल 2017 में इसरो ने एक साथ सिंगल मिशन में कुल 104 सॅटॅलाइट को अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक भेज दिया, इतिहास रच दिया था, ऐसा करने वाला भारत विश्व में पहला देश बन गया था, हालाकिं जनवरी 2019 में एलन मस्क के कंपनी स्पेस एक्स ने एक साथ सिंगल मिशन में कुल 143 सॅटॅलाइट भेज ये रिकॉर्ड तोड़ दिया।

इसरो ने चन्द्रमा पर अपने मिशन को बढ़ाते हुए जुलाई 2019 में चंद्रयान-2 मिशन लांच किया, जिसे भारत का शक्तिशाली राकेट GSLV Mark III M1 से लांच किया गया था। इस मिशन में एक रोवर जिसका नाम प्रज्ञान था, एक लैंडर विक्रम नाम का, शामिल था। इस मिशन का मकसद था चन्द्रमा के के सतह का अध्यन करना और मैपिंग करना एवं चाँद पर पानी के मौजूदगी का पता लगाना।

पर किसी कारणवशI इसका लैंडर जिसका नाम विक्रम था सही से लैंड नहीं कर पाया और संपर्क टूट गया, अगर ये सफल हो जाता तो भारत रूस, अमेरिका, चीन के बाद चौथे देश बन जाता  चन्द्रमा पर लैंडर लैंड करने वाला।

इसरो की आगामी योजनाएं  (ISRO Planned Mission)

ऐसे तो इसरो ढेर सारे मिशन पर बहुत ही तेजी से काम कर रहा है इनमे से कुछ मुख्य मिशन इस प्रकार है।

मिशन का नाम  लांच वर्ष  मिशन की जानकारी 
RISAT-1A 2021 यह एक राडार इमेजिंग सॅटॅलाइट है, जो की भूमि, सागर, मिटटी के बारे में जानकारी प्रदान करेगी।
गगणयान-1

 

गगणयान-2

गगणयान – 3

जून 2022 यह एक भारत की मानवयुक्त अंतरिक्ष यान मिशन है, इसमें तीन सदस्य दल को 7 दिनों तक अंतरिक्ष में भेजने की योजना तैयार की गयी है
आदित्य-L1 2022 यह भारत का सूर्य को अध्यन करने का पहला मिशन है।
चंद्रयान-3 2022 यह मिशन चंद्रयान-2 का अगला फेज है, चंद्रयान-2 जो लास्ट मिनट में सॉफ्ट लैंडिंग नहीं कर सका था।
NISAR जनवरी 2023 यह एक राडार इमेजिंग सॅटॅलाइट है, इस मिशन को इसरो और नासा दोनों मिलकर कर रहे है।
शुक्रयान -1 दिसंबर 2024 शुक्र के वातावरण को अध्यन करना
Lunar Polar Exploration Mission 2024 लैंडर और रोवर भेज, चन्द्रमा के साउथ पोल को अध्यन करना, इसे इसरो और जापान के स्पेस एजेंसी Jaxa मिलकर कर रहे है
मंगलयान – 2 2024 मार्श ऑर्बिटर मिशन-2 (MOM 2), यह चन्द्रमा को अध्यन करने के लिए एक ऑर्बिटर भेजा जायेगा।

मुख्य प्रक्षेपण यान (Launch Vehicle)

Satellite Launch Vehicle  (SLV-3) – यह भारत के द्वारा विकसित किया गया पहला राकेट है, पहला लॉच साल 1979 में असफल होने के बाद साल 1980 में सफल लांच किया, जिसके बाद भारत उन देशो के लिस्ट में शामिल हो गया, जिसके पास ऑर्बिटल लांच की क्षमता है।

Advanced Satellite Launch Vehicle (ASLV) – यह भी भारत का एक प्रक्षेपण यान है जिसे साल 1980 में विकसित किया गया था। जिसे geostationary orbit में सॅटॅलाइट को भेजने के लिए बनाया गया था।

Polar Satellite Launch Vehicle (PSLV) – यह एक medium-lift launch vehicle है। जो भारत को सूर्य के ऑर्बिटर में रिमोट सेंसिंग के जरिये सॅटॅलाइट को भेजने का क्षमता देता है।

Geosynchronous Satellite Launch Vehicle (GSLV) – यह इसरो के द्वारा विकसित किया गया एक बड़ा प्रक्षेपण यान है, जो भारत को सक्षम बनाता है। किसी भी प्रकार का ऑब्जेक्ट अंतरिक्ष में भेजने के लिए । यह एक भारत का सफल प्रक्षेपण यान है। वर्तमान समय में ये सक्रिय है। इस लांच व्हीकल से अब तक कुल 14 लांच किया जा चूका है साल 2001 से 2021 तक।

Geosynchronous Satellite Launch Vehicle Mark III (GSLV Mk III) – यह इसरो के द्वारा विकसित किया गया medium-lift launch vehicle है। और ये अब तक का भारत सबसे हैवी लांच व्हीकल (rocket है। इसमें लगे cryogenic engine इसे और शक्तिशाली बनाता है। मुख्य तौर पर इसे कम्युनिकेशन सॅटॅलाइट लांच करने के लिए बनाया गया है। भारत का चंद्रयान-2 मिशन इसी से लांच किया गया था।

ISRO के अध्यक्ष कौन है? (ISRO Chairman)

वर्त्तमान समय में इसरो के अध्यक्ष S Somanath (Sreedhara Panicker Somanath) है।

ISRO का फुल फॉर्म क्या है (ISRO Full Form in Hindi)

ISRO का फुल फॉर्म “Indian Space Research Organisation” होता है जिसे हिंदी में “भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान” कहा जाता है।

इसरों का मुख्यालय (Headquarter) कहाँ है?

वर्तमान समय में इसरो का मुख्यालय भारत के सिलिकॉन वैली के नाम से महशूर शहर बंगलौर (कर्नाटक ) में स्थित है।

FAQs –

Q.1 इसरो का संस्थापक कौन है?

Ans- विक्रमसारा भाई

Q.2 इसरो की स्थापना कब हुई

Ans- 15 अगस्त 1969 ईस्वी को

Q.3 भारत का प्रथम उपग्रह कौन सा है?

Ans- आर्यभट्ट

Q.4 भारत के अंतरिक्ष केंद्र का नाम क्या है?

Ans- भारत के राष्ट्रीय अंतरिक्ष केंद्र का नाम इसरो (ISRO) है।

Q.5 भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री कौन है?

Ans- भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा थे।

Q.6 अंतरिक्ष में जाने वाली प्रथम महिला कौन थी?

Ans- अंतरिक्ष में जाने वाली भारतीय मूल के प्रथम महिला कल्पना चावला थी।

Q.7 प्रथम अंतरिक्ष यात्री कौन था?

Ans- रूस के यूरी गागरिन अंतरिक्ष में जाने वाले प्रथम मानव थे।

Q.8 राकेश शर्मा के अंतरिक्ष यान का क्या नाम था?

Ans- सुयोज टी-11

Q.9 स्पेस में जाने वाले व्यक्ति को क्या कहते हैं?

Ans- अंतरिक्ष यात्री

Q.10 पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी क्या है?

Ans- 384400 किलोमीटर

Q.11 चंद्रमा पर जाने वाला प्रथम व्यक्ति कौन था 

Ans- चन्द्रमा पर जाने वाला प्रथम व्यक्ति नील आर्मस्ट्रांग थे। ये अमेरिका के रहने वाले थे और चन्द्रमा पर जाने वाला प्रथम देश अमेरिका ही था।

Q.12 भारत का प्रथम उपग्रह आर्यभट्ट अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक कब छोड़ा गया?

Ans- 19 अप्रैल 1975

Q.13 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ISRO के अध्यक्ष कौन है?

Ans- वर्तमान समय में इसरो के अध्यक्ष S Somanath (Sreedhara Panicker Somanath) है।

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आशा करता हूँ ये आर्टिकल इसरो (ISRO) क्या है? ISRO Full Form in Hindi आपको अच्छा और ज्ञानवर्धक लगा होगा इस जानकारी को आप अपने दोस्तों, सहपाठियों, रिश्तेदारों के साथ भी जरूर शेयर करे किसी भी प्रकार का सवाल, सुझाव आप कमेंट के माध्यम से पूछ सकते है, धन्यवाद!

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